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गूरु पूर्णिमा के दिन 2 शिक्षकों पर कार्रवाई, एक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति और एक नौकरी से बर्खास्त

BySurendra Jain

Jul 11, 2025

खबर पक्की, 11 जुलाई, रतलाम। शराब के नशे में पांचवीं की छात्रा की चोटी काटने वाले सहायक शिक्षक वीरसिंह मईड़ा को कलेक्टर राजेश बाथम ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर दंडित किया है। आरोपी शिक्षक को उसके कुकृत्य के लिए करीब 10 महीने बाद दीर्घशास्ति से दंडित किया गया है। शिक्षक मईड़ा के कृत्य का वीडियो पिछले साल शिक्षक दिवस पर वायरल हुआ था और दंड गुरु पूर्णिमा के दिन मिला। इसी दिन एक अन्य शिक्षक को भी बर्खास्त किया गया है।
जानकारी के अनुसार शासकीय हाईस्कूल नायन संकुल के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय क्रमांक 2 सेमलखेड़ी के सहायक शिक्षक वीरसिंह का एक वीडियो शिक्षक दिवस के दिन काफी वायरल हुआ था। यह वीडियो 4 सितंबर 2024 को रिकॉर्ड हुआ था। इसमें शिक्षक नशे की हालत में कक्षा 5वीं की एक छात्रा की चोटी काट कर शेखी बघारते हुए नजर आया था। मामला संज्ञान में आने पर मईड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। आरोपी की विभागीय जांच भी की जा रही थी। जांच रिपोर्ट आने पर कलेक्टर ने गुरु पूर्णिमा (10 जुलाई, 2025) को कलेक्टर राजेश बाथम ने मईड़ा को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया।
पुलिस ने दर्ज किया था केस
मामले में रावटी पुलिस ने आरोपी सहायक शिक्षक वीरसिंह के विरुद्ध किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75, बीएनएस की धारा 115(2), भारतीय दंड विधान की धारा 323 के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने शंकरलाल पिता मन्नालाल बोरिया (55) निवासी इंद्रा कॉलोनी रावटी की शिकायत पर केस दर्ज किया था।
लकड़ी और स्केल से की थी मारपीट, चोटी भी काटी
सहायक शिक्षक मईड़ा 4 सितंबर, 2024 को अपराह्न 4.30 बजे शराब के नशे में धुत्त होकर स्कूल पहुंचा था। जहां उसने पहले पांचवीं की एक छात्रा के साथ लकड़ी और स्केल से मारपीट की। इससे भी उसका जी नहीं भरा तो उसने कैंची लेकर छात्रा के बाल भी काट दिए थे।
इस शिक्षक को किया बर्खास्त
गुरु पूर्णिमा के दिन एक और शिक्षक को सजा मिली। कलेक्टर राजेश बाथम ने शासकीय हाईस्कूल उमर के प्राथमिक विद्यालय आमलीघाटा के निलंबित प्राथमिक शिक्षक ईश्वरलाल परमार को बर्खास्त कर दिया। यह कार्रवाई शिक्षक को कनिष्ठ खंड सैलाना के प्रथम व्यवहार न्यायाधीश एकाग्र चतुर्वेदी द्वारा दंडित किए जाने के कारण की गई है। न्यायालय ने अपराधिक प्रकरण क्रमांक एससीएनआईए 17/22 निर्णय दिनांक 03.09.2024 धारा 138 पराक्रम्य अधिनियम 1881 के अंतर्गत अपराध प्रमाणित किए जाने पर दोषसिद्ध होने से दंडित किया। आरोपी शिक्षक को सामान्य कारावास तथा 2 लाख 56 हजार 500 रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई। आरोपी शिक्षक का कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 के उपनियम(1) एवं (3) के अंतर्गत कदाचरण की श्रेणी में आता है। इसके चलते कलेक्टर ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 10(नौ) के तहत बर्खास्त किया।

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