खबर पक्की, 13 फरवरी, रतलाम। प्रदेश के पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी ने अपनी ही सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। रतलाम की पेयजल आपूर्ति को लेकर कनेरी जलाशय योजना के लाभ को रतलामवासियों के बजाय निवेश क्षेत्र को देने पर उन्होंने आपत्ति जताई है। इसके साथ ही, नर्मदा जल योजना के अस्तित्व में न आने और शासन तथा सिंचाई विभाग की धीमी कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में उनके वन मंत्री रहने के दौरान कनेरी जलाशय योजना को रतलाम नगर की पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक विकास के लिए स्वीकृति मिली थी। यह योजना 25 वर्षों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई थी, जिसमें रतलाम शहर के निवासियों को पेयजल उपलब्ध कराना और औद्योगिक क्षेत्र में 40 लाख गैलन पानी की आपूर्ति करना प्रमुख उद्देश्य था।
कनेरी जलाशय का पानी रतलाम के लिए जरूरी
कोठारी ने कहा कि उन्हें यह जानकर हैरानी हुई कि कनेरी जलाशय योजना से सिर्फ रतलाम के निवेश क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि शहर के लिए नर्मदा जल लाया जाएगा। पहले माही नदी से औद्योगिक निवेश क्षेत्र के लिए पानी लाने की योजना बनाई गई थी। कोठारी का कहना है कि कनेरी जलाशय से रतलामवासियों को पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि सिर्फ निवेश क्षेत्र को पानी दिया जाए।
नर्मदा जल योजना पर सवाल
कोठारी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने रतलाम शहर के लिए नर्मदा जल योजना का कोई ठोस प्लान नहीं बनाया है। उन्होंने कहा कि इस साल के बजट में भी रतलाम में नर्मदा पानी लाने की कोई योजना नहीं है, जबकि गर्मी के मौसम में शहर में जल संकट बना रहता है।
पूर्व मंत्री ने मध्यप्रदेश सरकार से नर्मदा नदी के जल को रतलाम लाने की योजना बनाकर वित्तीय स्वीकृति देने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने कनेरी जलाशय योजना से रतलामवासियों को प्राथमिकता के आधार पर पेयजल उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
पूर्व मंत्री कोठारी ने कहा- कनेरी जलाशय का पानी रतलामवासियों के लिए, निवेश क्षेत्र के लिए नहीं
