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जिलाधीश महोदय को जनता की ओर से खबर पक्की के संपादक सुरेन्द्र जैन का खुला पत्र

BySurendra Jain

Dec 21, 2024

खबर पक्की : 22 दिसंबर रतलाम

 माननीय जिलाधीश महोदय,
में पत्रकार सुरेन्द्र जैन संपादक खबर पक्की दिन प्रतिदिन नामांतरण से संबंधित शिकायत लेकर समाचार छपवा कर आवाज उठाने के लिए आने वाले आम जनता और किसान की और से आपके ध्यान में यह बात लाना चाहता हु कि संपूर्ण जिले में राजस्व विभाग द्वारा 1956-57 के राजस्व रिकार्ड में खसरे में सरकारी रही भूमि के नामांतरण से संबंधित प्रकरणों में कलेक्टर के आदेश  का हवाला देकर मनमाने तरीके से नामांतरण रोके जा रहे हैं जबकि मांगने पर आदेश नहीं दिखाया जाता है इससे गंभीर असमंजस और भेदभावपूर्ण स्थितियाँ पैदा हो रही हैं। इससे आपकी छवि खराब हो रही है और सरकार और आपकी बदनामी भी हो रही है। आपको इस बारे में जनता को स्पष्ट बताना चाहिए कि ऐसा मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता की किन धाराओं में किन कानून के तहत किया जा रहा है।
जनता के सवाल
विरोधाभासी निर्णय:
सर्वे नंबर 507/1 और 508 (कुआं झागर) जो 56,57 में सरकारी रही है के मामले में नामांतरण स्वीकृत हुआ है इसी प्रकार 457 /2 ग्राम धराड़  में56,57 में सरकारी रही भूमि का नामांतरण स्वीकृत हुआ है ऐसे अनेक उदाहरण है जबकि अन्य मामलों में इसे खारिज कर दिया गया। तो आखिर यह भेदभाव क्यों ऐसे प्रकरणों से भ्रष्टाचार की बू आती है
इस भेदभाव का आधार क्या है?
पटवारी रिपोर्ट और तहसीलदार के आदेश:
नामांतरण प्रक्रिया में पटवारी से 1956-57 की भूमि की स्थिति मांगी जाती है।
लेकिन तहसीलदार द्वारा खारिज करने में इसे आधार बनाया जाता है। जनता यह समझ नहीं पा रही है कि इसी सर्वे नंबर के जब पूर्व में 10 बार रजिस्ट्री में नामांतरण हो चुके हैं तो वह नामांतरण करने वाले तहसीलदार ri पटवारी चोर थे या अभी नामांतरण रोकने वाले चोर है। लेकिन रुका हुआ नामांतरण जब लेनदेन के आधार पर हो जाता है तो जनता समझ जाती है कि उनका नामांतरण क्यों नहीं हुआ।
यदि कुछ मामलों में नामांतरण स्वीकृत होता है, तो उस समय 1956-57 की भूमि की स्थिति को स्पष्ट क्यों नहीं किया जाता?
जनता की माँग
लिखित आदेश जारी करें:
1956-57 की भूमि के नामांतरण से संबंधित स्पष्ट और पारदर्शी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
भेदभाव की जांच करें:
उन मामलों की स्वतंत्र जांच करवाई जाए, जहाँ 1956-57 की सरकारी भूमि का नामांतरण स्वीकृत किया गया।
पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करें:
नामांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी और समान बनाए रखें।
जनता आपसे निवेदन करती हैं कि जनता की समस्याओं का समाधान करके न्याय प्रदान करें।
सादर आम जनता और किसान की और से सुरेंद्र जैन पत्रकार संपादक खबर पक्की

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