खबर पक्की : 5 अगस्त रतलाम, 1 अगस्त से संपदा टू सॉफ्टवेयर पर दस्तावेज पंजीयन की अनिवार्यता कर दिया जाने के बाद रजिस्ट्रार विभाग की सारी व्यवस्था चर मरा गई है। सर्विस प्रोवाइडर और दस्तावेज पंजीयन करने आने वाले उपभोक्ताओं में झगड़ा शुरू हो गया है क्योंकि चार-चार दिन में एक रजिस्ट्री संपन्न नहीं हो पा रही है। आज एक huf के रजिस्ट्री के लिए उपभोक्ता आया तो huf का ऑप्शन नहीं होने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो पाई और उसे वापस जाना पड़ा। इसी प्रकार कोई संपत्ति रोड पर है तो वह उसे अंदर बता रहा है अंदर की संपत्ति को बाहर बता रहा है। संपत्ति दो बत्ती कि है तो सैलाना बस स्टैंड बता रहा है सैलाना बस स्टैंड की है तो कहीं और बता रहा है मतलब वास्तविकता से कोसो दूर परिणाम दे रहा है अब कोई करे तो क्या करें। सरकार सारा परीक्षण जनता के ऊपर करना चाह रही है और बगैर परीक्षण के सॉफ्टवेयर को थोपा जा रहा है। अपने आप को जनहितेषि कहना वाली सरकार का जनता के हितों से कोई लेना-देना नहीं है। आपको बता दे कि यह चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस सॉफ्टवेयर को थोपा गया है इसमें रतलाम भी है जबकि इंदौर उज्जैन बड़े शहर में पुराना सॉफ्टवेयर पर ही काम हो रहा है। क्या जिले के जागरुक जन प्रतिनिधि जनता की समस्या पर ध्यान देंगे और संपदा वन पर पुनः रजिस्ट्री शुरू करने के प्रयास करेंगे।
