खबर पक्की, 29 जनवरी, रतलाम। स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान का आयोजन महात्मा गांधीजी की पुण्यतिथि 30 जनवरी से प्रारंभ होकर 13 फरवरी तक किया जाएगा। इस संबंध में कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार, सीईओ जिला पंचायत श्री अमन वैष्णव, सीएमएचओ डॉ. आनंद चंदेलकर, जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील एवं विभागीय अधिकारी, कर्मचरियों की उपस्थिति में अंतर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई।
कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने कुष्ठ का उपचार करवा रहे मरीजों को आवश्यक पुनर्वास एवं स्वस्थ्य तथा चिकित्सा सेवाऐं प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकृति से पीडित मरीजों को विशेष उपचार उपलब्ध कराऐं एवं नियमानुसार दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर जारी किए जाऐं तथा नये मरीजों की समय पर पहचान कर उपचार किया जाए। सीएमएचओ डॉ. आनंद चंदेलकर ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कुष्ठ पीडि़त व्यक्तियों के प्रति समाज में व्याप्त ‘भ्रांतियां एवं भेदभावÓ को समाप्त करना है। 30 जनवरी से 13 फरवरी के मध्य ग्राम सभा में कुष्ठ की जानकारी दी जानी है एवं अपील व संकल्प का वाचन किया जाना है।
अभियान के दौरान आशा, आंगनवाड़ी एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों के द्वारा कुष्ठ की जानकारी घर-घर तक पहुंचाया जाना है। गृह भेंट के दौरान संभावित कुष्ठ रोगियों की जांच कर खोजे गये, नये कुष्ठ रोगियों की जानकारी सुचीबद्ध करके सूची खंड चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से जिला स्तर तक पहुंचाया जाना है। ग्राम सभा प्रमुख, पंचायत सदस्यों द्वारा अपने क्षेत्र को कुष्ठ मुक्त करने का संकल्प लिया जाना है। अभियान के दौरान जिले में अधिक से अधिक नये कुष्ठ रोगियों की खोज कर उपचार प्रारंभ किया जाना एवं नये कुष्ठ रोगी के संपर्क में आये स्वस्थ व्यक्तियों को स्द्बठ्ठद्दद्यद्ग ष्ठशह्यद्ग क्रद्बद्घड्डद्वश्चद्बष्द्बठ्ठ खिलाया जाना है ताकि कुष्ठ के प्रसार को रोका जा सके।
डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि कुष्ठ एक कम संक्रामक रोग है। शरीर के किसी भी भाग पर चमडी के रंग से हल्का दाग या धब्बा जिसमें सुन्नपन हो, तंत्रिकाओं में सूजन, शरीर के किसी भाग में ठंडा गरम का अहसास ना होना, कुष्ठ रोग के सामान्य चिन्ह एवं लक्षण है। इसकी सही समय पर जॉच और उपचार कराने पर एमडीटी (मल्टी ड्रग थेरेपी) से यह पूरी तरह ठीक हो जाता है। कुष्ठ रोग का पूरा उपचार सभी शासकीय स्वस्थ्य केंद्रों पर पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है। कुष्ठ माइक्रोबेक्टीयिम लैप्री नामक बेक्टीरिया से होता है। यह अनुवांशिक रोग नहीं है। यह पूर्व जन्मकेपापों से नहीं होता है। इस रोग की शुरूआत में जॉच और पहचान हो जाए तो पूर्ण रूप से ठीकहो जाता है एवं शरीरिक विकलांगता से बचाया जा सकता है। इसका इलाज कुछ मामलों में छ: माह एवं कुछ मामलोंमें एक वर्ष तक कराना होता है।

