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इच्छा हमारी जीबी, पुण्य एमबी और संयम केबी हो गया : श्री ज्ञानबोधी विजयजी म.सा., सैलाना वालों की हवेली, मोहन टॉकीज में प्रवचन

BySurendra Jain

Jun 30, 2023

खबर पक्की, 30 जून, रतलाम। जन्म लिया है तो मृत्यु निश्चित है। यदि आपको डरना ही है तो मृत्यु से नहीं, जन्म से डरो। मृत्यु से बचने के लिए लोग कई तरह के जतन करते हैं लेकिन कोई बच नहीं पाता है और यदि जन्म ही नहीं होगा तो मोक्ष मिलेगा। दुनिया का सबसे बड़ा रोग ही जन्म है।
यह उदगार सैलाना वालों की हवेली, मोहन टॉकीज में आयोजित प्रवचन के दौरान आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा के आज्ञानुवर्ति पन्यास प्रवर मुनिराज श्री ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. ने जन्म और मृत्यु को परिभाषित करते हुए व्यक्त किए।
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी रतलाम के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन में मुनिराज ने बताया कि जन्म लेना ही सबसे बड़ा अपराध है, इसलिए मृत्यु निश्चित है। यदि कोई प्रयत्न करना ही है तो जन्म नहीं लेना पड़े ऐसा प्रयास करें। जहां जन्म नहीं, वहां मृत्यु नहीं। व्यक्ति जो प्रयत्न अमर बनने के लिए करता है, वही उसकी मौत का कारण बनता है।
मुनिराज ने कहा कि संसार में एक ही मां ऐसी है, जिसकी उम्र बेटी से छोटी होती है, जो की इच्छा है, एक पूरी होती है और दूसरी पैदा हो जाती है। पहले घर में टीवी नहीं था तो इच्छा होती थी कि टीवी आ जाए लेकिन जब वह आई तो एलईडी और होम थिएटर की इच्छा होती है। आज बच्चों के दिमाग में भगवान नहीं, आई फोन बैठ गया है। वर्तमान दौर में इच्छा हमारी जीबी है, पुण्य एमबी और संयम केबी का रह गया है।
मुनिराज ने कहा कि जीवन में चार तरह के गड्ढे कभी नहीं भरते है, जोकि मुक्तिधाम, सागर, पेट और लोभ-इच्छा का गड्ढा है। ज्ञानी पुरुष कहते हैं कि जन्म जैसा कोई रोग नहीं होता और इच्छा जैसा कोई दुख नहीं। सबसे बड़ा पाप ही सुख है। दूसरे को दुख दिए बिना कभी सुखी नहीं बन पाओगे। सुख की डिमांड हमें दुर्गति की ओर ले जाती है। प्रवचन में बढ़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित रहे।

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