खबर पक्की : 9 अप्रैल रतलाम, कल हुआ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का रतलाम दोैरा कई खट्टे मीठे अनुभव छोड़ गया, संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो दोरा सफल ही माना जाएगा और इसके लिए जिला प्रशासन को 100 मै से 100 नंबर देना चाहिए क्योंकि अगर वह प्लानिंग और इतनी मेहनत नहीं करता तो इतनी भीड़ जुटाई जाना संभव नहीं था। जिला प्रशासन ने जिले की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इसके लिए निर्देशित किया था और 500 से अधिक बसों का इंतजाम और वार्ड में मैजिक लगाई गई थी। भाजपाई पार्षदों ने मैजिक में कार्यकर्ता लाने का दावा तो किया लेकिन अधिकांश मैजिक खाली गई यह तो जिला प्रशासन के खौफ में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाया।…………… सुबह 7:30 बजे बगीचा खाली करवाने से लोग हुए नाराज: पुलिस प्रशासन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को सफल बनाने के चक्कर में इतनी शिद्दत से जुटा था कि मुख्यमंत्री के 12:30 बजे होने वाले कार्यक्रम के लिए सुबह 7:30 बजे ही रोटरी गार्डन को खाली करने का फरमान जारी कर दिया और कई पुलिस जवान गार्डन खाली कराने पहुंच गए इससे नियमित रूप से घूमने आने वाले महिला और पुरुषों को बहुत बुरा लगा जिस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील पाटीदार से पत्रकार सुरेंद्र जैन ने चर्चा कर बताया कि यहां नियमित घूमने वाले लोगों में बीमारियों से ग्रसित लोग भी होते हैं जो 1 दिन नहीं घूमे तो उनकी बीमारी बढ़ जाती है और साथ ही रोटी गार्डन में अंकुरित और जूस बनाने वाले का बिना वजह नुकसान होगा तो वे कहने लगे कि वीआईपी मूवमेंट है हम क्या कर सकते हैं इस पर बड़ी मुश्किल से उन्होंने 9:30 बजे तक गार्डन को खाली करने का हुक्म सुनाया लेकिन वीआईपी मोमेंट के बात करते वक्त वे शायद भूल गए कि इसी जनता ने मुख्यमंत्री को वीआईपी बनाया है अगर उसे ही तकलीफ दी जाएगी तो वह कितने दिन वीआईपी रह पाएंगे।………………….. प्रभारी मंत्री दिखें नाराज:…….. प्रभारी मंत्री ओमप्रकाश भदोरिया मंच की व्यवस्था से नाराज दिखे मंच पर की गई व्यवस्था के मुताबिक सीएम के पास की कुर्सी पर जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह लुनेरा की कुर्सी लगा दी गई और उसके पश्चात प्रभारी मंत्री की कुर्सी लगाई गई जिससे प्रभारी मंत्री नाराज दिखाई दिए क्योंकि स्वाभाविक तौर पर प्रोटोकॉल के हिसाब से मुख्यमंत्री की कुर्सी के पास मंत्री की कुर्सी होना चाहिए।…………………… स्टेडियम के दीवाल तोड़ने एवं स्टेडियम में कार्यक्रम होने से खेल प्रेमी हुए नाराज: ……… साल भर पहले 28 लाख की लागत से बनी दीवार मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए तोड़ देने से और स्टेडियम में कार्यक्रम होने के कारण कई दिनों तक खेल प्रेमी खेल से वंचित रहे इससे खेल प्रेमियों में नाराजगी रही सभी खेल प्रेमियों खिलाड़ियों का कहना था कि नगर का एकमात्र स्टेडियम है इसे राजनीतिक वाले कार्यक्रमों के लिए हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए और सिर्फ खेल के लिए आरक्षित रखना चाहिए राजनीतिक व अन्य कार्यक्रम कहीं पर भी किए जा सकते हैं लेकिन खेल कहीं पर भी नहीं हो सकता वह खेल के मैदान पर ही होगा।…………………… प्रबुद्ध जनों के साथ छल:……….. स्टेडियम में ढेरों घोषणाओं के बाद मुख्यमंत्री का श्रीजी पैलेस में चर्चा का कार्यक्रम रखा गया था जिसमें प्रशासन द्वारा भाजपा संगठन द्वारा दिए गए नामों के हिसाब से प्रबुद्ध जनों को फोन करके बुलाया गया था और बताया था कि मुख्यमंत्री उनके साथ चर्चा करेंगे इसके लिए लगभग 500 लोगों को आमंत्रण भेजे गए थे लेकिन कई लोग जिन को बुलाया गया था और नहीं आए थे जिसके कारण सभागार में लगभग 100 कुर्सियां खाली थी ऐसे लोगों ने खबर पक्की से चर्चा कर बताया कि उन्हें मालूम था कि मुख्यमंत्री कोई चर्चा वर्चा नहीं करेंगे सिर्फ अपना भाषण देंगे इसीलिए वे नहीं आए। यु तो कार्यक्रम में बहुत लोग शामिल हुए लेकिन खबर पक्की से 40 साल पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ता अशोक जैन लाला से चर्चा हुई तो उन्होंने भी कहा कि बुलाया तो चर्चा के लिए ही था लेकिन मुख्यमंत्री ने किसी से भी चर्चा नहीं की जो आश्चर्य का विषय है। इसी प्रकार चर्चा के लिए तैयारी से आए ग्रामीण क्षेत्र बिलपांक से पधारे वरिष्ठ संघ कार्यकर्ता अशोक पाटीदार से भी खबर पक्की ने चर्चा के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा की आयोजन तो चर्चा के लिए ही था पता नहीं एन वक्त पर क्या परिवर्तन हुआ लेकिन ऐसा करना उचित नहीं है। कार्यक्रम में उपस्थित एक युवा इंजीनियर ने कहा कि बुलाकर बेज्जती कैसे की जाती है उसका यह बढ़िया उदाहरण है………… मुख्यमंत्री के दोरा कार्यक्रम की समीक्षा से खबर पक्की को ऐसा लगा कि मुख्यमंत्री पार्टी नहीं प्रशासन के भरोसे चुनाव कार्यक्रम का आगाज कर रहे हैं यही कारण रहा कि कार्यकर्ताओं में नाराजगी और तरह-तरह की कानाफूसी सुनाई दी और कई कार्यकर्ता कहते सुने गए कि प्रशासन ही इन्हे चुनाव जीता देगा हमारी क्या जरूरत। संगठन और मुख्यमंत्री ने इन चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया तो आगे चुनाव की राह मुश्किल होगी।

