खबर पक्की :12 अक्टूबर रतलाम, एक तरफ अवैध कालोनियों के मामले में प्रशासन द्वारा आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई वहीं दूसरी तरफ निजी जमीन खरीद कर नियमानुसार काम करने वाले और शासन को करोड़ों का राजस्व देने वाले कॉलोनाइजर और बिल्डर उसकी आंखों में खटक रहे हैं। यही कारण है कि शहर के आसपास कि जो कीमती जमीन नई बसाहट और कॉलोनी डेवलपमेंट के लिए कॉलोनाइजरो द्वारा खरीद रखी है। वह लगभग सारी जमीन रतलाम विकास प्राधिकरण के माध्यम से अधिग्रहण करने की कार्रवाई के लिए कल 11 अक्टूबर को एक पत्र जारी किया गया है जिसमें शहर की 70 हेक्टेयर अर्थात 350 बीघा के लगभग जमीन रतलाम विकास प्राधिकरण अधिग्रहित कर कॉलोनी डेवलपमेंट करेगा। इसमें यह उल्लेखनीय है कि सर्वे नंबर 736 जिस पर पूर्व मैं ही कॉलोनी काटने के परमिशन अनुज्ञा व निर्माण अनुमति जारी हो चुकी है उक्त सर्वे नंबर को भी शामिल किया गया है। जबकि पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा जारी पत्र के अनुसार उपसर्ग नंबर को आईडिया की योजनाओं के लिए पूर्व में आरक्षित बताया गया था लेकिन कल जारी पत्र के अनुसार उसको 11 अक्टूबर की तारीख में आरक्षित किया जा रहा है जो कि सीधे-सीधे अपना निवेश कर नियमानुसार काम करने वाले कालोनाईजर को परेशान करने की मंशा दिखाता है। क्योंकि एक बार जहां किसी जमीन पर ने मौका पालन करते हुए अनुमति जारी हो चुकी है वहा किसी सार्वजनिक उपयोग के अलावा कालोनी काटने की मंशा से जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाता है। वैसे भी रतलाम विकास प्राधिकरण द्वारा पूर्व में काटी गई कॉलोनियों के विकास के मापदंड को देखते हुए प्रतिस्पर्धा में प्राइवेट कालोनाईजर ज्यादा बढ़िया काम करते हैं यही कारण है कि उनका माल हाथो हाथ बिक जाता है। वैसे भी रतलाम विकास प्राधिकरण में साथ आठ सालों से चेयरमैन की कुर्सी खाली है और खाली नौकर शाह के भरोसे इस तरह के प्रोजेक्ट लाकर शहर का विकास नहीं किया जा सकता यह बात शासन और जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को समझना होगी।

