खबर पक्की: 26 जून रतलाम, यू कहने को तो भारतीय जनता पार्टी का महापौर चुनाव कंट्रोल रूम गीता मंदिर रोड पर रंगोली मैरिज हॉल में चल रहा है। पर असली कंट्रोल रूम विसाजी मेंशन में फर्स्ट फ्लोर फर्स्ट स्थित कॉल सेंटर प्लस कंट्रोल रूम पर चल रहा है यहां दर्जनों कंप्यूटर और टी वी लगे हुए हैं टीवी स्टूडियो की तरह बने इस कंट्रोल रूम में सभी चैनलों पर कौन-कौन सी खबरें चल रही है। कौन कौन से अखबार में क्या-क्या खबर लगी है। किस-किस पोर्टल ने क्या क्या खबर लगाई है। इसकी सारी जानकारी बिफ्रिंग के साथ विधायक चैतन्य काश्यप के पास पहुंचती है। लगभग 15 सत्रह लोगों का स्टाफ इस काम में लगा रहता है कंप्यूटर में तमाम तरह के डाटा फिट है प्रत्येक वार्ड में कितने मतदाता है उसका कास्ट वाइज डाटा भी इन कंप्यूटरों में फिट है। उसी के आधार पर सारी रणनीति बनाई जाती है। इसके साथ-साथ पुराने तमाम तरह के चुनावी आंकड़े कौन कब जीता कौन कब हारा पूर्व में कितने मतदाता थे इसमें इस बार कितने बड़े घटे जैसे तमाम आंकड़े भी इन कंप्यूटर में फिट है। और उन आंकड़ों के आधार पर लगातार विश्लेषण चलता रहता है। तमाम जगह से आने वाले ई मेल उनका जवाब देने के लिए ट्रेंड स्टाफ यहां नियुक्त किया गया है। इस कॉल सेंटर कम कंट्रोल रूम पर किसी भी अनजान आदमी को आने की इजाजत नहीं है चारों तरफ से सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं कोई यहां का फोटो भी नहीं ले सकता। यहां आम बीजेपी कार्यकर्ताओं या किसी भी अन्य आदमी को भी जाने की इजाजत नहीं है। तमाम तरह की सूचना प्रौद्योगिकी से लैस इस कॉल सेंटर कम कंट्रोल रूम के कारण भाजपा कांग्रेस से अपने को काफी आगे मान रही है। यही कारण है कि रूठे हुए लोगों को मनाने की कोई खास मशक्कत नहीं की जा रही है। यही कारण है कि पूर्व महापौर सुनीता यादें के खासम खास जनक नागल और भाजपा के पूर्व मिडिया प्रभारी अरुण राव अभी तक महापौर चुनाव के लिए मैदान में डटे हुए हैं। पर जहां जीत पहले से ज्यादा मार्जिन के साथ निश्चित मानकर चल रहे हो तो वहां ऐसे बागियों की फिक्र आखिर कोई क्यों करें यही कारण था कि फायर ब्रांड नेता सीमा टाक को नाम वापसी के लिए स्वयं सीएम को फोन लगाना पड़ा।

