खबर पक्की : 8 जून रतलाम, प्रवीण सोनी, अशोक पोरवाल, दिनेश राठौर, प्रहलाद पटेल, राजेंद्र पाटीदार शुरुआत में यह चार पांच नाम उछल रहे थे महापौर प्रत्याशी के लिए भाजपा की तरफ से लेकिन पिछले चार-पांच दिनों से हर दिन नया नाम आ रहा है कभी संघ की तरफ से अशोक पाटीदार, दशरथ पाटीदार का सामने आता है तो कभी गुस्ताद अंकलेसरिया कभी एरोकेम इंडस्ट्रीज वाले नीलेश पटेल का, बताया जाता है कि आज मोहन मुरली वाले का नाम उछाला जा रहा है। भाजपा चाहे जैसे टिकट दे यह उसका आंतरिक मामला है पिछली बार सुनीता यार्दे टिकट भी इसी तरह फाइनल हुआ था। लेकिन राजनीतिक समझ बूझ की कमी और अफसरों से काम कराने की कला नहीं होने के कारण रतलाम पूरे 5 साल गड्ढे में रहा। भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता का यह मानना है कि संघ सत्ता और संगठन को यह समझना होगा कि हर बार भाजपा के नाम पर किसी को भी टिकट दे देने से और यह प्रचारित कर देने से की भाजपा के नाम से किसी गधे को भी टिकट दे दो जीत जाएगा इस मुगालते से बाहर आना होगा। बजाय पैराशूट उम्मीदवार को उतारने के जो रात दिन जनता के बीच में रहकर पार्टी का काम करता है पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रमों में शामिल होता है जनता और कार्यकर्ताओं के छोटे-मोटे कामों के लिए अफसरों को फोन लगाने की हिम्मत रखता है और काम कराने की ताकत रखता है ऐसे आदमी को टिकट देने पर ही संगठन सक्रियता से उस को जिताने के लिए मैदान में उतरेगा जिस व्यक्ति का कार्यकर्ताओं से कोई जुड़ाव नहीं है अगर ऐसे आदमी को टिकट दिया तो कार्यकर्ता भी घर से बाहर निकलने में 10 बार सोचेगा। भाजपा संगठन के लोग और कार्यकर्ताओं से बात करने पर यही निचोड निकल कर सामने आया है। अब देखना यही है कि सत्ता और संगठन अपने मनमर्जी करता है या कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान।

