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लोक प्रशांति कायम रखने कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने जनधन की हानि की रोकथाम के लिए धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश

BySurendra Jain

May 18, 2022

खबर पक्की, 18 मई, रतलाम। जिले में लोक प्रशांति कायम रखने कानून व्यवस्था बनाए रखने अप्रिय स्थिति तथा जनधन की हानि की रोकथाम के लिए आगामी 2 माह की अवधि के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एमएल आर्य द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिले में काफी संख्या में बंगाल से सोना चांदी के आभूषण बनाने वाले बंगाली कारीगर यहां आकर किराए का मकान लेकर सोना चांदी के व्यापारियों से संपर्क कर रोजगार प्राप्त कर लेते हैं। कारीगरों को रोजगार देने वाले एवं किराए से मकान देने वाले व्यक्तियों को इनकी जानकारी आवश्यक रूप से संबंधित थानों को देना अनिवार्य होगा। होटल, धर्मशाला, लाज में रुकने वाले यात्रियों की सूचना निर्धारित प्रपत्र में यात्रियों की आईडी प्रूफ की छाया प्रति के साथ होटल, धर्मशाला, लाज के मालिकों को तत्काल संबंधित पुलिस थाने में दिया जाना अनिवार्य होगा। घरेलू नौकरों को रखने वाले व्यक्तियों के लिए उसकी जानकारी 1 सप्ताह में निर्धारित प्रपत्र में भरकर संबंधित थाने में दिया जाना अनिवार्य होगा।
प्राइवेट हॉस्टल संचालकों को स्वयं की तथा उसके कार्यरत कर्मचारियों तथा वहां रुकने वाले व्यक्तियों की जानकारी मय आईडी कार्ड की छाया प्रति के निर्धारित प्रोफार्मा में 1 सप्ताह में संबंधित पुलिस थाने में दिया जाना अनिवार्य होगा। किसी भी धार्मिक स्थल जैसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च स्थानक मदरसा आदि स्थानों पर बाहर से आकर रहने वाले व्यक्तियों एवं लंबे समय तक रुककर धार्मिक प्रवचन देने वाले व्यक्तियों की जानकारी मय आईडी प्रूफ के संबंधित धार्मिक स्थल के संचालक को तत्काल संबंधित पुलिस थाने को देना अनिवार्य होगा। जिले में स्थित समस्त टोल नाकों के संचालकों को टोल नाकों पर काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी उनकी आईडी प्रूफ के साथ तत्काल संबंधित पुलिस थाने को देना अनिवार्य होगा। रतलाम जिले की सीमा में आने वाले प्रत्येक मकान मालिक अपने मकान में रहने वाले किराएदार की सूचना निर्धारित प्रोफार्मा में भरकर 1 सप्ताह में संबंधित थाने में दिया जाना अनिवार्य होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 188 के अंतर्गत दंडनीय अपराध का दोषी होकर उसे विधि के प्रावधानों के तहत अभियोजित किया जाएगा।

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