खबर पक्की: 3 अप्रैल रतलाम,सुनिए पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी, रतलाम विधायक चैतन्य कश्यप, रतलाम शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र कटारिया, पूर्व महापौर पारस सकलेचा रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश जैन और जैन समाज के सभी बड़े बड़े मठाधीशो को इस खबर को पढ़ने के बाद निगम की इस कार्रवाई का कड़ा प्रतिरोध और विरोध करना चाहिए। भगवान महावीर का अनुयायी जियो और जीने दो की भावना पर चलने वाला जो जैन समाज सभी समाजों के दुख तकलीफ में हर वक्त खड़ा रहता है हमेशा सामाजिक कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है हमेशा समाज और सरकार के सहयोग के लिए तत्पर रहता है 2 वर्ष के पूरे कोरोना काल में जैन समाज ने समाज के हर वंचित तबके की अपने तई पूरी ताकत के साथ तन मन धन से सेवा की और हमेशा करता है। मुट्ठी भर जैन समाज देश की अर्थव्यवस्था में एक चौथाई योगदान देता है सैकड़ों की तादाद में गौशाला स्कूलों को संचालित करता है। देश और रतलाम के सबसे ज्यादा सहनशील और अनुशासित इस समाज को इतना भी ज्यादा सहनशील नहीं होना चाहिए कि सब को सम्मान देने वाले इस समाज पर कोई भी नहला दहला आक्रमण करके इस के सम्मान की धज्जियां बिखेर दे। श्री पंचांन ओसवाल जैन समाज के चैत्र सुदी एकम नववर्ष गोठ आयोजन समिति के अध्यक्ष महेंद्र गादिया से खबर पक्की के संपादक ने चर्चा की तो उन्होंने बताया कि हम हमेशा गोठ स्थल को पूरी तरह साफ सुथरा करके वापस निगम के सुपुर्द करते है। नगर निगम का कोई व्यक्ति समाज के कलेक्शन काउंटर पर आया था और उसने निगम की तरफ से सफाई व्यवस्था के लिए ₹5000 मांगे थे तो दे दिए थे। ऐसा काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने अवगत कराया था। उन्होंने बताया कि समाज के गोठ में किसी प्रकार के पॉलिथीन या डिस्पोजल का उपयोग नहीं किया गया। ना ही किसी प्रकार से कोई गंदगी फैलाई गई। फिर भी नगर निगम ने गंदगी फैलाने का आरोप लगाकर रसीद बनाई और अखबारों में प्रकाशन करवाया इससे सभी का मन बहुत आहत हुआ है। सत्तारूढ़ दल सहित सभी राजनीतिक पार्टियों के राजनीतिक आयोजन सह भोज रैलियों आदि मैं जी भर कर डिस्पोजल का उपयोग किया जाता है और गंदगी फैलाई जाती है लेकिन वहां निगम कर्मचारियों की हिम्मत नहीं होती की फाइन करें। लेकिन 2 साल के कोरोना के कहर के बाद सामाजिक सद्भाव की मिसाल पेश करने वाले समाज के प्रत्येक व्यक्ति से चंदा लेकर होने वाले गोठ के इस सामुहिक कार्यक्रम में रतलाम नगर निगम द्वारा जैन समाज की सहनशीलता और सम्मान
की जिस तरह धज्जियां उड़ाई वह जैन समाज के प्रत्येक सदस्य के लिए चिंतन का विषय होना चाहिए। देश और समाज के लिए हमेशा अपना योगदान देने के लिए तैयार रहने वाला और लाखों करोड़ों खर्च करने वाले जैन समाज के लिए ₹5000 कोई मायने नहीं रखता लेकिन उस पर जो आरोप लगाया गया है वह मायने रखता है वह समाज के सम्मान को पलीता लगाता है। इस तरह के आरोप लगाने वाले निगम को ₹1 भी देना मैं उचित नहीं समझता अगर नगर निगम माफी मांग कर समाज को यह ₹5000 वापस करता है और समाज से किसी तरह चंदे की मांग करता है तो खबर पक्की अपने तरफ से ₹11000 देने के लिए तैयार है लेकिन समाज के सम्मान की कीमत पर ₹1 देना भी मेरे लिए पाप है।

