खबर पक्की: 3 फरवरी, छतरी पुल पर रहने वाली गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में आने वाली नानी बाई की रतलाम मेडिकल कॉलेज में कोरोना से 18 मई को मृत्यु हो गई थी। लेकिन देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद आज नवा महीना चल रहा है लेकिन उसके परिवार को 50000 का मुआवजा नहीं मिला। यही नहीं उसके आवास स्थल को भी बगैर किसी नोटिस के प्रशासन द्वारा तोड़ दिया गया। पूर्व में उसके लड़के सत्यनारायण सोलंकी ने आवेदन किया तो उसको यह बताया गया कि आप शादीशुदा हो तो आप को मुआवजा नहीं मिलेगा। उसके बाद उनका बड़ा लड़का मनोहर जो कि थोड़ा मंदबुद्धि है और उन्हीं के साथ रहता था और मेहनत मजदूरी करता है के नाम से आवेदन किया गया और सरकारी बाध्यता के चलता केनरा बैंक में उसका खाता खुलवाया गया लेकिन उसके बाद भी मां के जाने के बाद अनाथ हो चुके मनोहर को मुआवजा नहीं मिला और वह दरबदर भटक रहा है। हर काम पर अपनी पीठ खुद ही ठोकने वाला प्रशासन क्या गरीब मनोहर की सुध ले कर इसको मुआवजा देगा या देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का इसी तरह मखौल उड़ाता रहेगा। सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वह मुआवजा वितरण में व्यक्तिगत रुचि लेकर जरूरतमंदों को उनका हक दिलाएं।

