खबर पक्की :19 नवंबर रतलाम, खबर पक्की अवैध बस्तियों का किसी भी रूप में समर्थन नहीं करता है पर यह भी हकीकत है की प्रॉपर्टी बाजार की बढ़ती कीमतों ने गरीब और असहाय जनता के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं छोड़ा है सरकारे उनका व्यवस्थापन करने में असफल साबित हुई है। एक तरफ मुख्यमंत्री कहते हैं कि जो जहा रह रहा है उसको पट्टे दे दिए जाएंगे और प्रधानमंत्री उनको अधिकार पत्र सौंपने की बात करते हैं ताकि उन्हें लोन वगैरह मिल सके वह भी अवैध बस्तियों को प्रोत्साहित करने जैसा ही है। दूसरी तरफ रतलाम जिला प्रशासन अपने साहब बहादुर के नेतृत्व मे सिर्फ गरीब बस्तियों में कंक्रीट की रोड को उखाड़ कर रतलाम शहर में भय और दहशत का माहौल पैदा कर रहा है। अभी तक एक भी बिल्डर और कॉलोनाइजर के खिलाफ सशक्त कार्रवाई कर अपराध का केस नहीं बना है अपितु बेगुनाह और नीरअपराध अबोध जनता को जिन्होंने सस्ते के लालच में उक्त प्लाट खरीदे उन्हें कंक्रीट की सड़क तोड़कर नरक में जीने को विवश किया जा रहा है। निजी भूमि पर बने कंक्रीट की सड़क तोड़ना और बाउंड्री वाल को गिराना कतई बहादुरी भरा काम नहीं है अपितु यह राष्ट्रीय क्षति है जनप्रतिनिधियों जिला प्रशासन को यह बात समझना होगी और ऑल पार्टी मीटिंग बुलाकर शहर के हित में पक्ष-विपक्ष सहित सभी को पहल करना होगी। अगर आप अवैध कालोनियों की बसाहट को रोकना चाहते हैं तो आपको सस्ते और सुलभ आवास उपलब्ध कराने की गारंटी देना होगी बजाय बसी बसाई बस्तियों को उजाड़ने की क्योंकि आपका यह अत्याचार ही गरीब के अपने परिवार और आशियाने के उजड़ने पर आतंकवादी और नक्सली बनने पर मजबूर करता है। अभी तक जो भी तोड़फोड़ की गई है वह गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों पर ही की गई है जिसका शहर के किसी भी नेता और जनता ने समर्थन नहीं किया है। जब किसान अपने हक के लिए 1 साल तक आंदोलन को खड़ा कर सकते हैं और देश में आज तक की सबसे मजबूत सरकार को झुका सकते हैं तो क्या उसके आगे रतलाम की जनता और नेता इतने कमजोर है के पोहे कचोरी की दुकान पर खड़े होकर चटकारे दार बातें करने के बजाए इस विध्वंस के खिलाफ अपनी संवेदनशीलता एकता और ताकत नहीं दिखा सकते। अंत में खबर पक्की इन शब्दों के साथ अपनी बात को समाप्त करता है कि उनकी भी जिद है बस्तियां उजाड़ने की, हमारी भी जिद है बसे बसाये घरों को बचाने की। जय रतलाम जय जय रतलाम

