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द्वारका रेजिडेंसी खोदा पहाड़ निकली चुहिया नगर निगम और टाउन कंट्री प्लानिंग पर फूटा ठीकरा

BySurendra Jain

Oct 11, 2021

खबर पक्की : 11 अक्टूबर रतलाम, और अंततः आज 13 दिन बाद द्वारका रेजिडेंसी के मामले में कलेक्टर रतलाम द्वारा निर्णय दे दिया गया l निर्णय का लबबो लूबाब यह है कि कलेक्टर ने सीधे कोई आदेश पारित नहीं करते हुए नगर निगम रतलाम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को पूर्व में दी गई अनुमति आदेश का पुनः परीक्षण कर विधि अनुसार अनुमति निरस्त करने को आदेशित किया है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य शासन को लिखने के लिए आदेशित किया गयाl कलेक्टर द्वारा आज पारित आदेश में यह भी लिखा कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम के अधिकारियों द्वारा बिल्डर के साथ दूरभी संधि कर बिल्डर को अनुमति जारी की गई जिसका मतलब होता है बिल्डर व अधिकारियों द्वारा अपने निजी फायदे के लिए अनुमति दी गई l अब यहां एक प्रश्न खड़ा होता है जिस नजूल विभाग की एनओसी को आधार बनाकर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम द्वारा अनुमति जारी की गई उस नजूल विभाग कि उक्त एनओसी का इस आदेश में कलेक्टर द्वारा जिक्र न किया जाना कई प्रश्न खड़े करता है क्योंकि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम के अधिकारियों ने दुरभि संधि की तो उस दुरभि संधि की सबसे पहले शुरुआत तो collector नजूल से हुई क्योंकि उसी के आदेश को आधार बनाकर इन दोनों विभागों द्वारा अनुमति जारी की गई l यही नहीं एक शिकायत की जांच उपरांत पूर्व कलेक्टर रुचिका चौहान द्वारा अनुमोदित पत्र राज्य शासन के राजस्व सचिव को अपर कलेक्टर रतलाम द्वारा भेजा गया था उसमें भी स्पष्ट तौर पर बताया गया था कि उक्त जमीन रास्ते के उपयोग की है और उस पर कोई निर्माण नहीं किया जा रहा है l (चित्र देखें) आदेश में एक और तथ्य यह है कि शिकायत के संदर्भ में कलेक्टर द्वारा जो कमेटी बनाई गई उसमें अनुविभागीय अधिकारी रतलाम शहर, निगमायुक्त, और उप संचालक नगर तथा ग्राम निवेश विभाग है l अनुमति देने में तीनों ही विभाग के अधिकारियों का रोल है और इन्हें तीनो द्वारा जांच भी की गई और उनमें से अब 2 को अपने ही द्वारा जारी की गई अनुमति को निरस्त करने के लिए कहा जा रहा है साथ हि अपने स्वयं के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य शासन को स्वयं ही लिखने के लिए कहां जा रहा है यानी खुद के द्वारा जारी की गई अनुमति को खुद ही निरस्त कर गलत बताएं और खुद अपने खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहे l क्योंकि उक्त अनुमति वर्तमान उप संचालक वर्मा द्वारा स्वयं जारी की गई उन्होंने ही खुद जांच भी की और अब उन्हीं को कहा जा रहा है कि आप उस अनुमति को निरस्त कर अपने खिलाफ स्वयं कार्रवाई के लिए शासन को लिखें जबकि अपने ही विभाग द्वारा जारी की गई एनओसी के बारे में कलेक्टर ने चुप्पी साध ली और न यह स्पष्ट किया जा रहा है कि उक्त जगह का रास्ता के अलावा और क्या उपयोग हो सकता है l और 70 72 सालों से उस जगह का व्यवसायिक उपयोग हो रहा था ऑयल मिल चल रही थी तो लोग कौन से रास्ते से होकर आ जा रहे थे आगे जितने भी मकान बने हुए हैं वह भी सब उसी रास्ते से आवागमन किया करते थे और आज भी कर रहे हैं l साथ हि उक्त सर्वे नंबर में 1 पॉइंट 710 हेक्टेयर भूमि बताई गई है अर्थात लगभग 183000 स्क्वायर फीट भूमि तो बाकी की 168000 स्क्वायर फीट भूमि जो कि ₹33 करोड़ 60 लाख रुपया की होती है को किन लोगों ने हड़प किया और उनके खिलाफ जिला प्रशासन क्या कार्रवाई कर रहा है ऐसे बहुत सारे सवाल है जिसका इस निर्णय में कहीं जवाब नहीं मिल पा रहा है l

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