खबर पक्की: 21 अप्रैल रतलाम, रतलाम मेडिकल कॉलेज में कोरोना के इलाज की खास गोली फेवीफ़्लू जब से कोरोना का सेकंड दौर शुरू हुआ है एक बार भी नहीं आई है रतलाम मेडिकल कॉलेज के वर्तमान डीन डॉ जितेंद्र गुप्ता से जब फेवीफ़्लू के वर्तमान स्टॉक की जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा की फेवीफ़्लू का स्टॉक नील है पिछले साल तो आया था पर इस बार नहीं आया है। कोरोना के इलाज कि इतनी महत्वपूर्ण टेबलेट मेडिकल कॉलेज में ना होना और इसको भेजने के लिए शासन द्वारा कोई व्यवस्था न करना शासन की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है कुछ केमिस्ट ने बताया कि फेवीफ़्लू टेबलेट बाजार में भी आसानी से उपलब्ध नहीं है क्योंकि हर डॉक्टर कोरोना के इलाज में यही गोली लिख रहा है। मेडिकल कॉलेज कोरोना पॉजिटिव मरीजों से खचाखच भरा है और इतनी महत्वपूर्ण टेबलेट नहीं होने के बावजूद किस प्रकार मरीजों का इलाज हो रहा होगा आप समझ सकते है डॉक्टर और प्रशासन को दोष देना बहुत आसान है किंतु गोली दवाई की व्यवस्था करना शासन का काम है जब शासन ऊपर से दवाई ही नहीं भेजेगा तो डॉक्टर इलाज कैसे करेगा यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज में आने वाले कोरोना मरीज की मृत्यु दर इस बार ज्यादा है आपके पास इलाज के लिए टेबलेट नहीं है, रेमडेसीवर इंजेक्शन भी अल्प मात्रा में आ रहा है हालत बिगड़ जाने पर ऑक्सीजन नहीं है, वेंटिलेटर नहीं है, तो फिर बेचारा डॉक्टर क्या करेगा यही कारण है कि अल्प समय में मरीजों की हालत बिगड़ रही है शासन को तुरंत जरूरी दवाओं और उपकरणों की व्यवस्था करना चाहिए तभी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर औचित्य पूर्ण और सार्थक इलाज कर पाएंगे सामाजिक संस्था और दानदाताओं द्वारा एक सीमा तक हि व्यवस्था की जा सकती है जब तक शासन पूरे तौर पर सहयोग नहीं देता कोरोना मरीजों का इलाज इसी प्रकार परिणाम देता रहेगा जो रतलाम मेडिकल कॉलेज की छवि को खराब करेगा।
