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तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार

BySurendra Jain

Apr 18, 2021

खबर पक्की : 18 अप्रैल रतलाम, दोस्तों कोरोना अपने चरम पर है इसका नया स्ट्रेन 24 से 48 घंटे में लंग्स को इतना नुकसान पहुंचा रहा है कि एक बार अगर आप इसकी चपेट में आ गए तो आपकी सारी जिंदगी तहस-नहस हो जाने वाली है। निसंदेह इसमें सरकार के स्तर पर बड़ी चूक हुई है कि उसने इस बीमारी को हल्के में लिया और टीका आ जाने के बाद एकदम निश्चिंता धारण कर ली सुविधाओं को अपग्रेड करने स्टाफ भर्ती करने कोरोना से रिलेटेड दवाइयों मशीनों को खरीदने में ध्यान नहीं दिया और जब अचानक कोरोना का विस्फोट होना शुरू हुआ तो सरकार के हाथ पैर फूलने लगे फिर भी सरकार अपने स्तर पर काम कर रही है तमाम मानव संसाधनों, दवाइयों, इंजेक्शन, अस्पतालों, बेड, की कमी के बावजूद सारे स्वास्थ्य कर्मी और जिला प्रशासन अपनी पूरी हिम्मत और हिकमत के साथ अपने तई व्यवस्थाओं को सुधारने और प्रत्येक जान को बचाने के लिए कृत संकल्पित है यह अलग बात है की उसके बावजूद शत प्रतिशत जानो को बचाने में वह सफल नहीं हो पा रहा है और जिसके घर में हादसा होता है मृत्यु होती है उसका दुख वही जानता है पर ऐसे आफत और आपदा के वक्त में आपको अपना मानसिक संतुलन बनाए रखना है गेहूं में कंकर हर जाति हर समाज हर धर्म में हर जगह होते हैं कार्यरत स्टाफ जिस प्रकार शत-प्रतिशत जानों को बचाने में सफल नहीं है उसी प्रकार कार्यरत स्टाफ में शत प्रतिशत समर्पित इमानदार और सेवाभावी होना भी उतना ही मुश्किल है पर 1% कंकर के लिए 99% सेवाभावीयों को टारगेट बनाना कहां तक उचित है जो गलत है आप उसकी बकायदा कंप्लेंट करें शिकायत करें लेकिन जो सही काम कर रहा है उसको अगर प्रशंसा और पारितोषिक न दे सके तो कम से कम आलोचना करने से तो बचे। साथियों यह इतना भयानक वक्त है और इतना भयानक वायरस है के जब आपके अपने, अपनो से किनारा कर रहे है ऐसे में अपनी जान की परवाह न करने के बाद भी स्वास्थ्य अमला और जिला प्रशासन का अमला अल सुबह से देर रात तक आपकी हर संभव मदद और सेवा कर रहा है। यह मानव स्वभाव है कि 2 काम गलत होने या ना होने पर आदमी 98 अच्छे कामों को भूल जाता है फिर भी यह आरोप-प्रत्यारोप का वक्त नहीं है यह वक्त है कंधे से कंधा मिलाकर मानवता की सेवा करने का और मानवता को बचाने का। मानवता के इतिहास का यह बहुत मुश्किल दौर है और इस दौर से हमें निकलना ही होगा जिंदगी रही तो पैसा तो बहुत कमा लिया जायेगा पर अभी वक्त है पुण्य कमाने का आओ सब मिलकर मानवता की सेवा करें जिसके पास पैसा है वह पैसे से मदद कर जिसके पास समय है वह समय का दान करें जो जिस तरह से जैसे मदद कर सकता हो करना चाहिए यह आप और हम सब की परीक्षा की घड़ी है और इसमें हमें अव्वल आना ही है तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कुछ दे पाएंगे इस मुश्किल दौर मैं हौसला देने वाली शिवमंगल सिंह सुमन की यह पंक्तियां प्रासंगिक है कि। तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार, आज सिंधु ने विष उगला है, लहरों का यौवन मचला है, आज ह्रदय मैं और सिंधु मे साथ उठा है ज्वार, तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार, कि सागर की अपनी क्षमता है पर मांझी भी कब थकता है, जब तक सांसों में स्पंदन है उसका हाथ नहीं रुकता है, के मिट्टी के पुतले मानव ने कभी ना मानी हार, तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार।

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