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आस्था के नाम पर बर्दाश्त नहीं होगी हिंसा, मन की बात बोले मोदी

BySurendra Jain

Aug 27, 2017

नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को आकाशवाणी सेमन की बातकार्यक्रम के 35वें संस्करण के जरिए लोगों के साथ अपने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए सबसे पहले हरियाणा के हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। हिंसा देश बर्दाश्त करेगा कानून का अपमान।

उन्होंने देशवासियों को गणेश चतुर्थी और ओणम के साथ र्इद उल जुहा की शुभकामनाएं देते हुए स्वच्छता पर भी जोर दिया। आधुनिकता को स्वच्छता से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि इन दिनों पर्यावरण के प्रति सजगता देखा जा सकता है। मोदी ने गणेश चतुर्थी में इकोफ्रेंडली गणेश की मूर्तियों की तारीफ की।

स्वछता मिशन के तीन साल पूरे होने की बात कहते हुए उन्होंने कहा, शौचालय की प्रतिशतता बढ़ी है। गुजरात के बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने वहां के बनासकांठा में स्वच्छता के लिए एकता का उदाहरण दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने हरियाणा में हुई हिंसा पर चिंता जताई। पीएम मोदी ने कहा कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। हिंसा ना ही देश बर्दाश्त करेगा और ना ही सरकार। आस्था के नाम पर कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। ये देश गांधी और बुद्ध का है। हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीएम ने कहा कि मैंने लाल किले से भी कहा था कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी। हर किसी को कानून के सामने झुकना होगा, कानून जवाबदेही तय करेगा और दोषियों को सजा दे के रहेगा।

त्योहारों का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि शायद ही 365 दिन में कोई दिन बचता होगा जो कि हमारे यहां त्योहार से जुड़ा हुआ हो। इन दिनों गणेश चतुर्थी की धूम मची हुई है। सभी देशवासियों को गणेशोत्सव की बहुतबहुत शुभकामनाएं। अभी केरल में ओणम का त्योहार मनाया जा रहा है। भारत के रंगबिरंगे त्योहारों में से एक ओणम केरल का एक प्रमुख त्योहार है। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों को ईदउलजुहा की भी बधाई दी।

स्वच्छता का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि 2 लाख 30 हजार से भी ज्यादा गांव, खुले में शौच से अपने आपको मुक्त घोषित कर चुके हैं। शौचालयों की कवरेज 39% से करीबकरीब 67% पहंची है। मैं आह्वान करता हूं कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती से 15-20 दिन पहले से हीस्वच्छता ही सेवामुहिम चलाएं। ऐसा स्वच्छता खड़ी कर दें कि 2 अक्टूबर सचमुच में गांधी के सपनों वाली 2 अक्टूबर हो जाए।

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