खबर पक्की: 26 मई । नई दिल्ली,ऊंचे पहाड़ों में स्थित लिपुलेख दर्रे को उत्तराखंड में धारचुला से जोड़ने वाली एक प्रमुख सड़क के निर्माण को लेकर भारत और नेपाल के संबंधों में आई गिरावट के बीच नेपाल के रक्षा मंत्री ने सोमवार को भारतीय सेना प्रमुख पर अपने देश का अपमान करने का आरोप लगाया।
पिछले हफ्ते भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने कहा था कि उत्तराखंड में बनी नई सड़क का नेपाल द्वारा विरोध ऐसा मालूम होता है जैसे वो किसी के इशारे पर किया जा रहा हो. उनका इशारा स्पष्ट रूप से चीन की तरफ था।
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार नेपाल के रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल ने एक स्थानीय अखबार से कहा, ‘यह अपमानजनक बयान नेपाल के इतिहास को दरकिनार करते हुए और हमारे सामाजिक विशेषताओं और स्वतंत्रता को अनदेखा करते हुए दिया गया। इसके साथ ही भारतीय सेना प्रमुख ने नेपाली गोरखा आर्मी के जवानों की भावनाओं को भी आहत किया है जिन्होंने भारत की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनके लिए अब गोरखा सैन्य बलों के सामने सिर उठाकर खड़े रहना मुश्किल हो गया है।’
8 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया था जिससे लाखों हिंदू श्रद्धालुओं के लिए तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा पहले से आसान हो जाएगी।
भारत जिस सड़क का निर्माण कर रहा है, वह उत्तराखंड को तिब्बत से लगी सीमा पर लिपुलेख दर्रे से जोड़ती है और जमीन के उस हिस्से के साथ-साथ चलती है जिसपर दोनों देश अपना-अपना दावा करते हैं। नेपाल का कहना है कि यह सड़क उसके क्षेत्र में अतिक्रमण है, लेकिन भारत इसका दृढ़ता से विरोध करता है।
