• Thu. Jul 30th, 2026

कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा में भारी भ्रष्टाचार की विधायक व कलेक्टर को शिकायत

BySurendra Jain

Feb 4, 2020

खबर पक्की : 4 फरवरी रतलाम, कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा में हो रहे भारी भ्रष्टाचार की शिकायतें पहले भी उठती रही है। लेकिन शासन प्रशासन व जिला कलेक्टर द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया यही कारण है कि कृषि विज्ञान केंद्र कालू खेड़ा से संबंधित आंबा की निकरा परियोजना के संचालकको ने वापस भ्रष्टाचार की शिकायत करते हुए विधायक व कलेक्टर को शिकायत पत्र भेजा है। उक्त शिकायत पत्र को जनता की जानकारी के लिए यहां ज्यों का त्यों प्रकाशित किया जा रहा है।कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा में भारी भ्रष्टाचार की विधायक व कलेक्टर को शिकायत की गई।
(1) आम्बा की निकरा परियोजना में नोडल एजेंसी कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा ने योजना के प्रारंभ से (लगभग 4 वर्ष से) ही पूरी अपारदर्शिता बनाए रखी। कई बार लिखित और मौखिक मांग करने पर भी परियोजना की गाइडलाइन कार्यकारी समिति को उपलब्ध नहीं कराई गई। कभी भी समिति को वार्षिक बजट, आवंटित राशि, योजनाओं का स्वरूप आदि से संबंधित लिखित प्रपत्र नहीं दिए गए। केवल जुबानी निर्देशों से ही कार्य करवाया जाता रहा है।
(2) वार्षिक बजट, आवंटित राशि, व्यय की गई राशि आदि से संबंधित जानकारियां सूचना के अधिकार अंतर्गत दो बार मांगी गई, जो नहीं दी जा रही हैंं।
(3) संभवतः केवीके के इशारे पर ही एसआरएफ ने समिति की कार्यवाही पुस्तिका से तीन बैठकों की अंकित कार्यवाही के पन्ने फाड़कर निकाल लिए। जिनमें शायद केवीके तथा एसआरएफ के भ्रष्टाचार के सबूत थे। इसीलिए लिखित शिकायत देने पर भी केवीके ने एसआरएफ के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की।
(4) वर्ष 2018-19 में परियोजना के अंतर्गत मात्र 60 हजार रु. खर्च किए गए। जबकि बिल 6 लाख 30 हजार रु. के लगाए गए। कई बार लिखित में मांग करने पर भी इस वर्ष के आय-व्यय का ब्यौरा समिति को नहीं दिया जा रहा है।
(5) परियोजना के कर्मचारी (एसआरएफ) द्वारा किए गए 40 से 50 हजार के गबन के सबूत समिति के पास हैं। लेकिन उन्हें जांच कर वसूल करने के बजाए उसे रफा-दफा कर दिया गया है।
(6) परियोजना के कस्टम हायरिंग सेंटर के गरीब कर्मचारी का वेतन 2 वर्ष के बाद 4500 रु. से घटाकर 2250 रु. किए जाने का कोई ठोस कारण लिखित मांग करने पर भी केवीके लिखित में देने के लिए तैयार नहीं।
(7) दो गरीब हितग्राहियों से प्रत्येक से 10-15 हजार रु. खर्च करवा कर पिंजरे बनवा लिए गए। किंतु उन्हें 50-50 चूजे डेढ़ वर्ष इंतजार कराने के बाद दिए गए। 8 दिन के चूजों की उम्र 15 दिन बताई गई। उन्हें रोग प्रतिरोधक टीके भी नहीं लगाए गए थे। जबकि नियमानुसार 28 दिन के चूजे 3 प्रकार के वैक्सीन लगा कर दिए जाते हैं। आने के 8-10 दिन के अंदर ही वे सारे मर गए। दिया गया प्रत्येक चूजा 25-30 रु. से ज्यादा मूल्य का नहीं था, लेकिन उनकी कीमत 100 रु. प्रति चूजे के हिसाब से बिल लगाए गए।
(8) परियोजना के भ्रष्ट कर्मचारी एसआरएफ के विरुद्ध आर्थिक व अन्य 13 लिखित शिकायतें देने पर भी पहले तो 8 माह तक जांच ही नहीं करवाई। बहुत दबाव बनाने पर जांच तो करवाई, लेकिन दोषी सिद्ध होने पर भी उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की, बल्कि 2 माह का वेतन (60 हजार रु.) उसके बाद भी दिया। इस प्रकार सिद्ध दोषी व्यक्ति पर परियोजना के 3 लाख रु. कुर्बान किये गए।
(9) परियोजना में फंड होते हुए भी फंड न होने का झूठ बोलकर ग्राम समिति से कृषि उपकरण क्रय करने के लिए 30 हजार रु. मांगे, तथा नये यंत्रों के लिए राशि मांगकर समिति को टूटे-फूटे और पुराने यंत्र थमा दिये।
(10) परियोजना के फंड से लगभग 40-40 हजार रु. मूल्य के दो कल्टीवेटर क्रय किए गए थे। जिसमें से आम्बा में कृषकों के उपयोग के लिए केवल एक ही दिया गया। दूसरा लापता है।
(11) स्वयं कृषि वैज्ञानिकों को उन्नत कृषि यंत्रों की जानकारी किसानों जितनी भी नहीं है। वे किसानों को कृषि यंत्रों की गलत जानकारियां लिखित में दे रहे हैं।
(12) खेत तालाब निर्माण योजना में भ्रष्टाचारी बचत करने के उद्देश्य से कृषकों को खुदाई में निकलने वाले मिट्टी, मुरम, पत्थर आदि विक्रय करने की कानून विरोधी सलाह दी गई।
(13) परियोजना के जबलपुर, हैदराबाद तथा दिल्ली स्थित वरिष्ठ कार्यालयों को अनियमितताओं की शिकायत करने पर आए जांच दल द्वारा लीपापोती की गई। उस जांच की शिकायत करने पर पुनः दूसरा दल आया, जिसके आधे सदस्य पूर्ववर्ती जांच दल में भी शामिल थे। केवीके के अधिकारी भी जांच दल में शामिल थे। जब आरोपित ही यदि अपने विरुद्ध की गई शिकायतों की जांच करेंगे, तो भला जांच निष्पक्ष कैसे हो सकती है ? शिकायतकर्ताओं को जांच के परिणाम से अवगत भी नहीं कराया गया।
(14) परियोजना की कार्यपालन समिति द्वारा हिसाब-किताब मांगने पर केवीके सख्त नाराज है। उसने अपनी समझ से आम्बा की कार्यपालन समिति भंग कर दी है, तथा समिति को नोटिस जारी कर परियोजना का कार्यालय बंद कर सभी दस्तावेज, फर्नीचर तथा कस्टम हायरिंग सेंटर के सभी कृषि उपकरण उसके सुपुर्द करने के निर्देश दिए हैं।
(15) निम्न कारणों के होते हुए निकरा की कार्यपालन समिति केवीके का यह बेईमानी भरा निर्णय मानने से इंकार करती है –

A अभी तक समिति को पिछले जांच दल के जांच प्रतिवेदन की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। यदि केवीके को आम्बा में मौजूद सारे दस्तावेज दे दिए जाते हैं, तो किए गए भ्रष्टाचारों के सबूत निश्चित ही नष्ट कर दिए जाएंगे।
B आंबा के 4 निवासियों की परियोजना में लगभग 2 लाख रु. की लेनदारियां बाकी हैंं। जब परियोजना यहां कार्यरत रहते हुए भी उनके भुगतान नहीं कर रही थी, तो फिर यहां से जाने के बाद तो भुगतान की उम्मीद भी नहीं रहेगी।
C 31.01.2020 की बैठक में समिति के कुल 20 में से 11 उपस्थित थे। सभी सदस्यों ने केवीके के निर्णय के विरोध में हस्ताक्षर किए हैं।
D केवीके परियोजना का मुख्यालय नवाबगंज में बनाना चाहता है, लेकिन 31.01.20 20 की बैठक में केवीके के निकरा अधिकारियों को नवाबगंज तथा दौलतपुरा के समिति सदस्यों तथा जनसामान्य से हस्ताक्षरित एक पत्र भी दिया गया है, जिसमें उनका कहना है, कि व्यापक किसान हित में निकरा परियोजना का कार्यालय और कस्टम हायरिंग सेंटर आंबा में ही रखना उपयुक्त है।
E अभी केवीके भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोपों से घिरा हुआ है। जब तक वह निर्दोष साबित नहीं होता, या इसकी सजा नहीं भुगत लेता, इतने बड़े कदम उठाने का उसे कोई नैतिक अधिकार भी नहीं है। फिर भी यदि वैसे कदम उठाता है, तो स्वत: ही और भी बड़ा दोषी साबित होता है।
F मामला अभी जिलाधीश कार्यालय में विचाराधीन है। वहां से कोई फैसला आने के पूर्व स्थिति में कोई परिवर्तन करना भी ठीक नहीं है।

error: Content is protected !!