भोपाल। इंदौर जिले के महू में रक्षा मंत्रालय की करीब 2.646 हैक्टेयर जमीन को जिला प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत से 2004 में निजी भूमि बताकर बेच दिया गया। भूमि को खरीदने वाले लोगों ने जब रक्षा मंत्रालय की जमीन पर कब्जा करने के लिए दबाव बनाया तो रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने विरोध किया।
फर्जी तरीके से जमीन का सौदा होने के बाद भी भूमि खरीदने वाले लोगों ने हाईकोर्ट की शरण ली मगर अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया और रक्षा मंत्रालय की जमीन को निजी भूमि में परिवर्तित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकायुक्त को प्रकरण दर्ज करने को कहा। रक्षा मंत्रालय को भी अपने अधिकारियों की सहभागिता का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक महू में रक्षा मंत्रालय ने सैन्य स्कूल स्थित फायरिंग रेंज के लिए 1988 में 483.295 हैक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया था जिसमें भाटखेड़ी के सर्वे नंबर 332/3/1 की 2.646 हैक्टेयर जमीन भी शामिल थी। उपरोक्त सर्वे नंबर की अधिग्रहित जमीन का मुआवजा अहमद मुख्त्यार की विधवा सुब्ररत्न बी और हसन ने ले लिया था।
मगर 18 मार्च 2004 को इस जमीन को पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से आसमा बी व अब्दुल समद ने खरीद लिया। 25 मई 2006 को सरकारी रिकॉर्ड में भी उनके नाम से जमीन दर्ज हो गई। इसके बाद 13 मई 2016 को मप्र भू राजस्व संहिता के तहत इसका डायवर्सन हो गया और 14 जनवरी 2016 को नगर एवं ग्राम निवेश से इसका ले-आउट प्लान भी स्वीकृत हो गया।
इसके बाद अधिग्रहित जमीन को निजी भूमि में परिवर्तित कराकर कथित रूप से हथियाने वालों ने रक्षा मंत्रालय को 16 दिसंबर 2017 से लगातार नोटिस भेजना शुरू किए। यही नहीं इन्होंने जिला अदालत में भी याचिका लगाई लेकिन पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट 1971 के तहत अदालत ने इसे खारिज कर दिया और फिर ये हाईकोर्ट पहुंचे। वहां भी अदालत ने रक्षा मंत्रालय की जमीन को निजी भूमि में परिवर्तित करने का षड़यंत्र पाया।
इसमें जिला प्रशासन के तमाम अधिकारियों जिनमें राजस्व, पंचायत व ग्रामीण विकास और नगर व ग्राम निवेश विभाग के अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध पाया गया। हाईकोर्ट ने याचिका कर्ताओं आसमा बी व अब्दुल समद की याचिका को खारिज करते हुए लोकायुक्त संगठन को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश पर लोकायुक्त संगठन ने इसमें जांच शुरू कर दी है। लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने शिकायत दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही लोकायुक्त संगठन द्वारा मामले में जांच के लिए राज्य शासन से दस्तावेजों के आधार पर प्रतिवेदन मांगा है। लोकायुक्त ने प्रमुख सचिव राजस्व, प्रमुख सचिव पंचायत व ग्रामीण विकास और नगर व ग्राम निवेश के इंदौर स्थित कार्यालय के प्रमुख को नोटिस जारी किया है। इन सभी अधिकारियों से 13 जनवरी 2020 तक प्रतिवेदन मांगा गया है।
इंदौर जिले के महू में रक्षा मंत्रालय की जमीन को निजी भूमि में परिवर्तित कर बेचा
