खबर पक्की: 4 नवंबर नई दिल्ली, भ्रष्टाचार निरोधी एजेंसीया देश में बिजनेस के माहौल को नुकसान पहुंचा रही है, कोई भी जांच एजेंसियों के झमेले में फंसना नहीं चाहता क्योंकि देश में दर्जनों एजेंसीया है जो कि वित्तीय धोखाधड़ी की जांच करती है)* इस बात को महसूस करते हुए की भ्रष्टाचार निरोधी एजेंसीया देश में बिजनेस के माहौल को नुकसान पहुंचा रही है, सरकार उनके पर कतरने जा रही है। अगर वाणिज्य मंत्रालय कंपनी एक्ट में बदलाव करता है तो सी.बी.आई और ई.डी 50 करोड़ से ज्यादा की बैंक धोखाधड़ी के मामले में खुद ब खुद मामला दर्ज नहीं कर पाएगी। उन्हें पहले नए पुनर्गठित बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा कि मामला आपराधिक जांच के लायक है या नहीं।
जांच एजेंसियों की शक्ति के कारण बैंक मैंनेजरो और प्रबंध निदेशकों में डर का माहौल है जिसके कारण वे लोन को मंजूर नहीं कर रहे हैं और सेफ गेम खेल रहे हैं। नौकरशाही भी कोई फैसला लेने से पहले शीर्ष नेतृत्व या सचिवों की कमेटी से स्पष्ट आदेश चाहती है। इससे मामला खींचता चला जाता है क्योंकि कोई भी बाद में जांच एजेंसियों के झमेले में फंसना नहीं चाहता है। राफेल समेत कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भी भारत सरकार के समक्ष चिंता जताई थी कि हर वित्तीय एक्ट के तहत विभिन्न एजेंसियों द्वारा बड़े स्तर पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं। इतना ही नहीं देश में दर्जनों एजेंसीया है जो कि वित्तीय धोखाधड़ी की जांच करती है।
केवल सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) ही नहीं सी.बी.डी.टी और सी.बी.ई.सी एस.एफ.आइ.ओ के पास भी आपराधिक मामलों में जांच करने की शक्ति है और वे कर चोरी के मामले में व्यवसायियों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर सकती है। इसके अलावा बैंकिंग नियमन एक्ट के तहत दिवालियेपन की कार्रवाई, अवैध फॉरेन ट्रेड एवं रेवेन्यू इंटेलिजेंस निदेशालय, ब्लैक मनी एक्ट, एम.आर.टी.पी.सी. एक्ट के तहत कंपनी फ्रॉड और अन्य भी है। टैक्स में कटौती के बाद सरकार उन भारतीय और विदेशी कंपनियों के डर को दूर करना चाहती है जो कि यहां बड़े निवेश की इच्छुक है इसलिए जांच एजेंसियों के पेच कसने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए केवल मौखिक आदेश से काम नहीं चल सकता है इसलिए कारपोरेट अफेयर्स एक्ट में संशोधन की तैयारी की जा रही है ताकि एस.एफ.आइ.ओ.और अन्य जांच एजेंसिया बेलगाम ना दौड़े। किसी बड़े धोखाधड़ी मामले को जांच एजेंसियों को सौंपने से पहले सलाहकार बोर्ड प्राथमिक स्तर की जांच करेगा। 50 करोड़ से ऊपर के बैंक धोखाधड़ी के मामले जिनमें जनरल मैनेजर और उससे ऊपर के अधिकारी शामिल होंगे, उन्हें पहले इस बोर्ड को भेजा जाएगा।
जांच एजेंसियों के कारण बिजनेस के माहौल को पहुंच रहा है नुकसान, पर कतरने की तैयारी में सरकार
