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श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में धूमधाम से मनाया जा रहा है पर्वाधीराज पर्युषण महापर्व

BySurendra Jain

Sep 10, 2019

पर्युषण पर्व – सातवां दिन*
उत्तम तप धर्म
खबर पक्की : रतलाम। आज दशलक्षण वीतराग धर्म का सातवां लक्षण – उत्तम तप का दिन है । इस अवसर पर आगरा से पधारे आमंत्रित विद्वान “पंडित गणतंत्र जी जैन शास्त्री” ने प्रवचन संख्या में बताया कि तप अध्यात्म की गरिमा से अभिमंडित शब्द है। ज्ञान और तप एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ज्ञान के बिना तप कुतप तथा तप के बिना ज्ञान कुज्ञान की श्रेणी में आ जाता है। ज्ञान,तप से युक्त मानव मोक्षार्थी है।
आचार्य श्री पूज्यपाद ने कहा है “तप्यते इति तपः”- जो तपा जाये सो तप है। यश सिद्धि कर मार्ग तपश्चरण आत्मा को परमात्मा बनाने का प्रयोग सिद्ध सूत्र है। संयम द्वारा मन को मोङा, परिवर्तित किया जा सकता हैं , परंतु मन को मरोङने के लिए तप की महाशक्ति ही चाहिये। अनशन, अनोदर आदि बाह्य तप है और प्रायश्चित, विनय, वैयावृत्य आदि अंतरंग तप है। इन दोनों प्रकार के तपों से आत्मा की कलुषता नष्ट होती है। तप कर्म क्षय का कारण है।
संसार में इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। तप इन इच्छाओं पर नियंत्रण करने में सहायक है। बिना नियंत्रण के यह जीवन ऐसा ही है जैसे बिना ब्रेक की मोटरगाङी। ऐसी गाङी स्वयं के लिए खतरे का कारण तो होती है लेकिन दूसरों को भी दुख में डाल सकती है।
रात्रि को होने वाले सांस्कृतिक प्रोग्राम की श्रंखला में श्रीमती मेघना बड़जात्या, प्रीति गोधा एवं श्वेता पाटनी द्वारा पर्युषण महापर्व के सातवें दिन जैन धर्म पर आधारित एक बहुत ही मजेदार प्रोग्राम रखा गया चलो सम्यक्त्व की ओर ईस प्रोग्राम में चार टीमो ने भाग लिया, जिनका नाम है ज्ञान आराधना – तप आराधना – दर्शन आराधना एवं चरित्र आराधना इन टीमों के मध्य पांच विभिन्न मजेदार राउंड्स में यह प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसे मौजूद समाज जनों द्वारा सराहा गया।

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