खबर पक्की, 19 अगस्त, रतलाम। विशेष न्यायालय (अजा/अजजा अत्याचार निवारण अधिनियम) रतलाम के न्यायाधीश रवीन्द्र प्रताप सिंह चुण्डावत ने सुपारी देकर हत्या कराने के एक गंभीर मामले में फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 3-3 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
शासकीय अधिवक्ता डीपीओ योगेश कुमार तिवारी ने मामले में शासन का पक्ष रखा, जबकि उप-निदेशक अभियोजन श्रीमती आशा शाक्यवार ने प्रकरण की विस्तृत जानकारी दी। अभियोजन के अनुसार, मामला 14 दिसंबर 2020 का है। ए.यू. स्मॉल फाइनेंस कंपनी में कार्यरत मृतक मुकेश का आरोपी ?अशोक (पिता कारूलाल, उम्र 25 वर्ष) – निवासी दिलीप मार्ग, सैलाना, रतलाम से महिला मित्र (सूरताबाई) को लेकर ग्राम सतबडलिया में विवाद हुआ था। इसी रंजिश के चलते आरोपी अशोक ने अपने साथी ?लाला उर्फ ललित (पिता शहजाद खान मेवाती, उम्र 40 वर्ष) – निवासी ग्राम कुशलगढ़, पिपलौदा, रतलाम को 2.5 लाख रुपये में मुकेश की हत्या की सुपारी दी।
हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए अशोक ने 35 हजार रुपये में पाताखेड़ी निवासी धन्नालाल हाड़ी से एक पिस्टल खरीदकर लाला को दी। इसके बाद लाला और तीसरे सह-आरोपी दिनेश (पिता शंकरलाल चंद्रवंशी, उम्र 40 वर्ष) – निवासी ग्राम कुशलगढ़, पिपलौदा, रतलाम ने मिलकर मृतक मुकेश की रेकी की और योजनाबद्ध तरीके से 14 दिसंबर 2020 की रात मुंशीपाड़ा के पास गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा
घटना के दिन मृतक का भाई लक्ष्मण जब मुंशीपाड़ा से गुजर रहा था, तब उसने सड़क किनारे मुकेश की बाइक (रूक्क 43 ष्ठछ्व 1946) और उसे लहूलुहान हालत में पड़ा देखा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मुकेश को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मर्ग कायम कर जब तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य (कॉल डिटेल व पिस्टल की बरामदगी) जुटाए, तो पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ। न्यायालय ने मौखिक, दस्तावेजी और मेडिकल साक्ष्यों को सही मानते हुए तीनों आरोपी अशोक, लाला, दिनेश को धारा 302/34, 120बी, आयुध अधिनियम एवं स्ष्ट/स्ञ्ज एक्ट की धाराओं के तहत दोषी पाया और सजा सुनाई।
