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रतलाम औद्योगिक जगत के पितृपुरुष वरिष्ठ उद्योगपति सुरेंद्र पोरवाल नहीं रहे, अंतिम यात्रा निजनिवास सोमवार 8 जून सुबह 9.30 बजे वाहन द्वारा त्रिवेणी मुक्तिधाम जाएगी

BySurendra Jain

Jun 7, 2026

खबर पक्की, 7 जून, रतलाम। शहर के वरिष्ठ उद्योगपति एवं औद्योगिक जगत के पितृपुरुष सुरेंद्र पोरवाल का 76 वर्ष की आयु में इंदौर स्थित निजी अस्पताल में देवलोकगमन हो गया, सुरेंद्र पोरवाल अपने पीछे बड़ी विरासत छोड़ गए है। आपने अपने अनुज विरेंद्र पोरवाल के साथ मिलकर 1972 में पोरवाल इंडस्ट्रीज की स्थापना की एवं बिना किसी समझौते के 51 वर्षों से अधिक ईमानदारी से उद्योग संचालित किया द्य आप संभागीय उद्योग संघ रतलाम के पूर्व अध्यक्ष एवं पाउडर मेटलर्जी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संस्थापक मार्गदर्शक भी रहे।
अपने इंजीनियरिंग ज्ञान से रतलाम, प्रदेश एवं देश में कई छोटे बड़े उद्योग स्थापित करवाये, उद्योगों की लागत कम करवाई जिससे कि उद्यमी उद्योग स्थापित करने की हिम्मत जुटा सकें। आज उनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से प्रदेश एवं देश के कई छोटे बड़े उद्योग संचालित हो रहे हैं।
पाउडर मेटलर्जी विषय को भारत के उद्योगपतियों से परिचय करवाया , विशेष तौर पर जो आयरन पाउडर स्वीडन एवं अन्य देशों से आ रहा था उसका उद्योग 1978 में रतलाम में स्थापित किया एवं उसकी लागत को कम करा जिससे कि सरकारी कंपनियों एवं उद्योगपतियों को अरबो रुपए का फायदा पहुंचा। साथ ही पाउडर मेटालर्जी की मशीन स्वयं डिजाइन एवं नवाचार कर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगपतियों को उपलब्ध करा उद्योग स्थापित करवाये जिससे कि जो मेटल पाउडर विदेशों से ज्यादा भाव में भारत में आ रहा था वह भारत में ही बनने लगा। आपके द्वारा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, टीवीएस सुंदरम फास्टनर आदि ऑटोमोबाइल ओईएम निर्माता, टाटा स्टील, जिंदल स्टील आदि को अपने उद्योग में निर्मित आयरन पाउडर दिया गया जिससे कि उनकी निर्माण लागत एवं विदेशों पर निर्भरता कम हुई। सुरेंद्र पोरवाल द्वारा पाउडर मेटलर्जी उद्योग हेतु चीन से अच्छे और सस्ते उपकरण अपनी रतलाम फैक्ट्री में निर्मित किए गए जिससे उद्योगपतियों की आयात पर निर्भरता कम हुई एवं उन्हें आर्थिक लाभ भी पहुंचा। आपके द्वारा अपने उद्योग पर प्रतिदिन शाम 5 से शाम 7 के समय नए उद्यमियों एवं उद्योगपतियों को मार्गदर्शन दिया जाता रहा द्य आपने अपने पीछे हराभरा परिवार जिसमें भाई विरेंद्र पोरवाल, पुत्र आदित्य एवं अंकित, भतीजे वरुण एवं सिद्धार्थ, पोते-पोती एवं निस्वार्थ उद्योग सेवा, संस्कारों एवं ईमानदारी से उद्योग संचालन की विशाल विरासत छोड़ी है। आपकी अंतिम यात्रा आपके रामबाग (गुलाब चक्कर) स्थित निवास से सोमवार 8 जून सुबह 9.30 बजे निकलेगी।

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