खबर पक्की : 27 फरवरी रतलाम, कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम मनमाने तरीके से अपने पावर को इंजॉय कर रहे थे। अपने मर्जी से मन माफिक जांच कमेटीया बना रहे थे और उनको मन माफिक रिपोर्ट देने का कह रहे थे। जी हां यह शब्द मेरे नहीं इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच के जज अरविंद धर्माधिकारी और गजेंद्र सिंह के है। मामला है रतलाम के तत्कालीन कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम द्वारा सैलाना ओवर ब्रिज के नीचे बनाई जा रही रेरा अप्रूव्ड द्वारका रेजिडेंसी के खिलाफ मन माने तरीके से कार्रवाई करने का। 11 अक्टूबर 2021 को कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम द्वारा सरकार के 26 विभागों से अनुमतियां प्राप्त पूर्णतया कानून सम्मत हो रहे निर्माण को अपने क्षुद्र स्वार्थ के लिए मनमानी और हट धर्मिता पूर्ण कार्रवाई करते हुए उक्त बिल्डिंग परमिशन को रद्द कर दिया और बनी बनाई कांक्रीट रोड को खुदवा दिया था तथा उसके खुदाई के 240000 बिल्डर से वसूल करने के आदेश दे दिए थे। लगभग साढ़े तीन साल चले उक्त केस में गत 11 फरवरी को फैसला रिजर्व कर लिया गया था और 25 तारीख को आए फैसले में कोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। अशोक जैन और राजीव रावत द्वारा पूर्व में की गई शिकायतों पर तत्कालीन कलेक्टर रुचिका चौहान द्वारा जांच करवाई गई थी और शिकायत को जांच उपरांत कोई अनियमितता ना पाते हुए जांच रिपोर्ट को नस्तीबद्ध करने के लिए शासन को पत्र लिख दिया था। किंतु इसके उपरांत भी कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने अपने अधीनस्थ विभागों को के अधिकारियों व कर्मचारियों की कमेटी बनाकर अपने मन माफीक रिपोर्ट देने के लिए दबाव बनाया। जबकि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम और कलेक्ट्रेट में पदस्थ अधिकारियों ने उनको समझाने की काफी कोशिश की लेकिन कलेक्टरी उनके सर चढ़कर बोल रही थी और उन्होंने किसी की एक बात ना मानते हुए मनमर्जी से सारे नियम कानून को दरकिनार करते हुए उक्त विधि सम्मत निर्माण अनुमतियों को रद्द कर दिया। जबकि सरकार के सारे दस्तावेज राजस्व विभाग के दस्तावेज सरकार के गजट नोटिफिकेशन मास्टर प्लान चीख चीख कर बोल रहे थे कि इसमें किसी प्रकार का कोई भी अनियमन नहीं हुआ है। कल हाई कोर्ट की डबल बेंच ने इसी बात को रेखांकित करते हुए यह पाया कि उक्त बिल्डिंग पूरी तरह वैध है और इसमें कहीं किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं है और तत्कालीन कलेक्टर द्वारा सारे तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर उक्त मनमानी कार्रवाई की गई थी। लिहाजा कोर्ट ने सारी बिल्डिंग परमिशन बहाल करते हुए बिल्डर को बिल्डिंग कंप्लीट करने का निर्देश दिया और उस पर लगाया गया 2 लाख 40000 का खुदाई का जुर्माना भी निरस्त कर दिया। ज्ञातव्य है की रतलाम का तत्कालीन प्रभावशाली मीडिया भी बिल्डर से लाखों रुपए के विज्ञापन लेने के बावजूद उसके पक्ष को और शासन प्रशासन व नगर निगम द्वारा प्रदान की गई तमाम वैध परमीशनों को स्पष्टता से नहीं रख रहा था और प्रशासन की हां मैं हां मिलाकर रतलाम के वैध प्रॉपर्टी बाजार का भट्टा बिठा रहा था। लेकिन आज आए हाई कोर्ट के इस फैसले ने रतलाम प्रॉपर्टी बाजार को आक्सीजन प्रदान कर दी है।
