खबर पक्की: 25 दिसंबर रतलाम, किसी को एक-दो दिन का नोटिस देकर तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है तो किसी को नोटिस के महीनो बाद भी कोई कार्रवाई नहीं सुविधा का संतुलन बैठ गया तो कार्रवाई ठंडे बस्ते में। जी हां जिले का निजाम इसी तरह चल रहा है यहां लोअर कोर्ट और सेशन कोर्ट के आदेशों की तो बात ही छोड़ो हाईकोर्ट के आदेश का भी अपनी सुविधा से पालन किया जाता है नहीं तो उसको भी ठेंगा दिखा दिया जाता है। कस्तूरबा नगर में गली नंबर 7 के 60 फीट की रोड पर 30-40 फीट के अतिक्रमण को लेकर इंदौर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के दो जजों के फैसले को कोर्ट ने 30 दिन में पालन कराने का आदेश दिया था। किंतु जिला प्रशासन की आंखों के तारे रतलाम शहर पटवारी रमेश बैरागी के कारण रतलाम जिला प्रशासन और निगम प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। वर्ष 2018 से लंबित यह कार्रवाई नहीं होने पर कुछ जागरूक नागरिकों को हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा अपने व्यक्तिगत श्रम समय और पैसा बर्बाद करने के बाद हाई कोर्ट से आदेश तो ले आए पर प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है। पटवारी रमेश बैरागी का घर भी इसी गली में है और उन्होंने भी लगभग 10 12 फीट का अतिक्रमण कर अपने ऑफिस निर्माण कर रखा है। यही कारण है कि लोगों को खून के आंसू रुलाने वाले जिला प्रशासन के कर्ता-धर्ता अभी तक कोर्ट का आदेश पालन करवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं 10 दिसंबर को नोटिस जारी होने के बाद 10 दिन का समय 20 दिसंबर तक का तो वहां के निवासियों को यूं ही दे दिया और उसके बाद भी अभी 5 दिन और निकल गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होना यही साबित करता है कि इनके लिए हाई कोर्ट का आदेश या जनता का हित सर्वोपरि ना होकर लाभ हानि का गणित ही सर्वोपरि है।

