खबर पक्की : 1 दिसंबर रतलाम, एक तरफ जिला प्रशासन कानून से अनभिज्ञ आम आदमी के खिलाफ कार्यवाही पर तुला हुआ है और उनका आर्थिक नुकसान किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर आम आदमी को उलझाने वाले बड़े बिल्डरों कॉलोनाइजर के खिलाफ एक भी कार्रवाई मजबूती के साथ नहीं की जा रही है नहीं उन अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जा रही है जिनके कार्यकाल में मिलीभगत से यह सब होता रहा है। जिला प्रशासन की ताकत के आगे आम आदमी की हैसियत मच्छर से ज्यादा कुछ नहीं है यही कारण है कि उन्हें मसला जा रहा है लेकिन मगरमच्छों को खुली छूट है इसकी बानगी कल देखने में आई जब प्रशासन के हवाई दावों को हवा दिखाते हुए रतलाम आइस फैक्ट्री की रजिस्ट्री रजिस्ट्रार ऑफिस में पेश हो गई। शर्तों के अधीन दिया गए पट्टों पर उक्त फैक्ट्री की जमीन महाराजा द्वारा लीज पर दी गई थी लेकिन अफसरों की मिलीभगत से कोर्ट में शासन का पक्ष ठीक ना रखने के कारण पट्टा धारक को कोर्ट से भूमि स्वामी घोषित कर दिया गया और उसके बाद अफसरों ने हाईकोर्ट के फैसले की अपील सुप्रीम कोर्ट में समय पर करना उचित नहीं समझा और यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट में समय पर अपील नहीं किए जाने के कारण पट्टा धारक को वहां पर भी सफलता मिल गई लेकिन वर्तमान जिला प्रशासन से लोगों को कुछ उम्मीद जगी थी वह कल रजिस्ट्री पेश होने के साथ ही ध्वस्त हो गई बताया जाता है कि उक्त रजिस्ट्री 7 करोड़ की अभी पेश हुई है और बाकी की रजिस्ट्री भी जल्दी ही हो जाएगी।

