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दूध के दाम बढ़ाने की मांग, दूध उत्पादक और विक्रेताओं के साथ प्रशासन की बैठकज् दोनों पक्षों ने प्रशासन पर छोड़ा निर्णय

BySurendra Jain

May 1, 2026

खबर पक्की, 1 मई, रतलाम। शहरवासियों को जल्द ही दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का एक और झटका लग सकता है। दुग्ध उत्पादक किसानों ने जनवरी में हुए समझौते के मुताबिक चार महीने बाद दाम बढ़ाने की मांग फिर से उठा दी है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागृह में प्रशासन, दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के बीच अहम बैठक हुई, लेकिन कीमतों पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। दोनों पक्षों ने अंतिम निर्णय कलेक्टर पर छोड़ दिया है। अब सबकी निगाहें प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं।
दरअसल, जनवरी 2026 में दूध उत्पादकों ने अचानक 4 रुपए बढ़ाकर दूध के दाम 58 से 62 रुपए प्रति लीटर कर दिए थे। इस पर विवाद बढऩे के बाद कलेक्टर मिशा सिंह के हस्तक्षेप से समझौता हुआ और कीमत 60 रुपए प्रति लीटर तय की गई थी। साथ ही प्रशासन द्वारा चार महीने बाद पुन: समीक्षा का आश्वासन दिया गया था।
उसी आश्वासन के आधार पर अब उत्पादकों ने फिर से कीमत बढ़ाने की मांग रखी है। जिसके बाद आज कलेक्टर मिशा सिंह के निर्देश पर बैठक आयोजित हुई,जिसमें एसडीएम सुश्री आर्ची हरित ने दूध उत्पादक और विक्रेता दोनों पक्षों की बात सुनी।
बैठक में शहर के आसपास के विभिन्न गांवो से पहुंचे दुग्ध उत्पादक किसानों ने साफ कहा कि पशु चारा, दवाइयों और रखरखाव की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में दूध के दाम बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कम से कम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने की मांग रखी। साथ ही फैट के आधार पर दूध लेने की व्यवस्था लागू करने की भी बात कही। किसान नेता डीपी धाकड़ ने उत्पादकों की तरफ से बात रखी।
वहीं, दूध विक्रेताओं ने बार-बार कीमत बढ़ाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि साल में सिर्फ एक बार ही दाम बढ़ाए जाएं। हालांकि इस बिंदु पर दोनों पक्षों में सहमति बन गई कि दूध के दाम साल में एक बार ही बढ़ेंगे।
बैठक में दूध की गुणवत्ता और फैट के आधार पर मूल्य निर्धारण को लेकर भी चर्चा हुई। उत्पादकों ने सुझाव दिया कि मावा और फैट के आधार पर आपसी सहमति से दूध खरीदा जाए, ताकि दोनों पक्षों को संतुलन मिल सके।
लंबी चर्चा के बावजूद यह तय नहीं हो पाया कि दाम कितने बढ़ेंगे और कब से लागू होंगे। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखने के बाद अंतिम निर्णय प्रशासन पर छोड़ दिया है।

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