खबर पक्की: 25 अप्रैल रतलाम। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में लिया गया निर्णय — तहसीलदारों से नामांतरण का अधिकार वापस लेना — एक साहसिक एवं जनहितैषी पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य स्पष्ट है: भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देना।
इस निर्णय के लागू होने से न केवल अवैध वसूली और फर्जीवाड़े की संभावनाएं कम होंगी, बल्कि आम जनता को लंबे समय से झूल रही फाइलों और दफ्तरों की दौड़धूप से भी राहत मिलेगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मध्य प्रदेश सरकार भी इसी तर्ज पर अपने राजस्व तंत्र में बदलाव लाएगी?
प्रदेश में कई ऐसे अधिकारी हैं जिनकी “अन्य आय” की चर्चाएं आम हैं और जिनकी वजह से आम नागरिकों को “अन्याय” का सामना करना पड़ता है।
जनता की मांग है कि मध्य प्रदेश सरकार भी ऐसी प्रक्रियाओं में परिवर्तन लाए, जहाँ अधिकारियों को अनावश्यक अधिकार देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। अगर छत्तीसगढ़ की तरह मध्य प्रदेश भी जनहितैषी योजना के अंतर्गत कोई ठोस निर्णय लेता है, तो यह आम लोगों के लिए बड़ी राहत होगी।
छत्तीसगढ़ सरकार का निर्णय न केवल सराहनीय है, बल्कि एक उदाहरण भी है, जिसे अन्य राज्यों को भी अपनाना चाहिए। यह समय है जब प्रशासन को जवाबदेह बनाने और जनता को सशक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
