खबर पक्की: 28 दिसंबर रतलाम, लोगों की निजी जमीन पर अपने खून पसीने की कमाई से बने निर्माण को अवैध बताकर रोते बिलखते परिवारों के सामने जेसीबी का पंजा लगाकर भय और आतंक फैलाने वाला प्रशासन कस्तूरबा नगर की गली नंबर 7 मैं सरकारी सड़क पर 40 40 फिट कब्जा कर अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ क्यों इतना मेहरबान बना हुआ है के नोटिस नोटिस का खेल खेले जा रहा है। 23 अक्टूबर को हाईकोर्ट के डबल बेंच के फैसले के बावजूद निगम रिकॉर्ड से नक्शा और दस्तावेज देखने के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ना करते हुए 10 दिसंबर को नोटिस जारी कर अतिक्रमण करने वालों से ही दस्तावेजों की मांग की जाती है 20 तारीख तक का समय दिया जाता है। समय निकल जाने के बावजूद हाईकोर्ट के आदेश को खूंटी पर टांग कोई कार्रवाई नहीं की जाती। और 22 तारीख को पुनः याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर उससे दस्तावेजों की मांग की जाती है जबकि याचिकाकर्ता उसके पूर्व ही सारे दस्तावेज नगर निगम को दे चुका है। आश्चर्यजनक बात यह है कि कॉलोनी का नक्शा नगर निगम में होता है उसमें सारी सड़कों की चौड़ाई स्पष्ट रूप से होती है अपने दस्तावेजों से कार्रवाई न करते हुए सामने वाले से दस्तावेज मांगना सिर्फ कार्रवाई को किसी तरह टालने की कोशिश है। जहां अंधे को भी साफ दिखाई दे रहा है और कार्रवाई करने के लिए हाई कोर्ट का आदेश स्पष्ट आधार है वहां कार्रवाई ना करते हुए शहर में अवैध निर्माण के नाम पर नोटिस नोटिस का खेल लोगों का तेल निकाल रहा है हर काम में नियम कायदे और सिस्टम की दुहाई देने वाले लाडले विधायक की और लोग टकटकी लगाये पथराई आंखों से निहार रहे हैं कि जहां हाई कोर्ट का स्पष्ट आदेश है वहां कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही और पूर्व में जारी इतने सारे नोटिस का क्या हुआ पहले उनका हिसाब दे दिया जाए फिर आगे नोटिस जारी हो तो अच्छा रहेगा।

